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छह दोस्त। एक घर। एक आखिरी सफ़र।
उदय, श्रवण, बिपिन, अतुल, हर्ष और मयंक वर्षों बाद फिर एक साथ आए हैं। पुरानी दोस्ती लौटती है और एक लंबे समय से अधूरे पड़े गोवा ट्रिप का सपना आखिरकार पूरा होने वाला है। उन्हें लगता है कि आने वाले दिन सिर्फ हँसी, सफ़र और नई यादों से भरे होंगे।
लेकिन उनसे हजारों किलोमीटर दूर, रूस में कुछ ऐसा घट रहा है जिसे दुनिया अभी समझ नहीं पाई है। अजीब मेडिकल घटनाएँ, बढ़ते मामले और लोगों के बदलते व्यवहार के बीच एक अनजान खतरा धीरे-धीरे फैल रहा है।
जब तक दुनिया को सच्चाई का एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
गोवा का सफ़र अब छुट्टी नहीं—ज़िंदा रहने की दौड़ है।
शहर बदल रहे हैं। लोग बदल रहे हैं। और इन दोस्तों के सामने अब सिर्फ एक सवाल है—
**क्या वे इस प्रलय में साथ रहकर ज़िंदा बच पाएँगे?**
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