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भारतवर्ष की आध्यात्मिक परंपरा में निंबार्क संप्रदाय का स्थान अद्वितीय है। "जगतगुरु निंबार्काचार्य: सनातन के सूर्य" उस महान आचार्य के जीवन, दर्शन और युगों तक फैली शिष्य-परंपरा का प्रामाणिक इतिहास प्रस्तुत करती है, जिन्होंने द्वैताद्वैत सिद्धांत के माध्यम से सनातन धर्म को नई दिशा दी।
यह ग्रंथ केवल एक जीवनी नहीं, अपितु वर्षों के गहन शोध, प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन और तीर्थ-भ्रमण से संकलित एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। लेखक ने वैष्णव बैरागी परंपरा के मूल स्रोतों तक पहुँचकर उन भूले-बिसरे तथ्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है, जो आज विस्मृति के कगार पर हैं।
सूर्य के समान तेजस्वी इस आचार्य-परंपरा की गाथा, इतिहास-प्रेमियों, शोधार्थियों तथा सनातन धर्म के जिज्ञासुओं—सभी के लिए समान रूप से मूल्यवान सिद्ध होगी।
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