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सनातन अयोध्या खंड–2 :

रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान
Naresh Das Vaishnav Nimbark
Type: Print Book
Genre: Religion & Spirituality, History
Language: Hindi
Price: ₹581 + shipping
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Description

सनातन अयोध्या खंड–2: रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान एक शोधपरक ऐतिहासिक ग्रंथ है, जिसमें अयोध्या की वैष्णव बैरागी परंपरा, अखाड़ों, छावनियों, संतों और महंतों की संस्थागत उपस्थिति तथा रामजन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का दस्तावेजी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

इस ग्रंथ में 1855 के हनुमानगढ़ी संघर्ष से लेकर 1949 के अभिलेखों, 1986 के न्यायालयीन घटनाक्रम, 1989 के शिलान्यास, 1990 के कारसेवा, 1992 की निर्णायक घटना, 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय और 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय तक उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायिक अभिलेखों के आधार पर घटनाओं को समझने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक में वैष्णव बैरागी अखाड़ों की भूमिका को केवल परंपरागत कथनों के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध अभिलेखों, न्यायालयीन दस्तावेजों, सरकारी सामग्री, ऐतिहासिक स्रोतों और मौखिक इतिहास के तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। मौखिक साक्ष्यों को उनके स्रोत और स्वरूप के साथ अलग से रखा गया है, ताकि प्रमाणित दस्तावेज और परंपरागत स्मृति एक-दूसरे के स्थान पर न रखे जाएँ।

इस शोध का मूल सिद्धांत है—“जहाँ दस्तावेज बोलते हैं, वहाँ इतिहासकार को अपनी आवाज धीमी कर देनी चाहिए।”

यह ग्रंथ अयोध्या, रामजन्मभूमि, वैष्णव बैरागी अखाड़ों और भारतीय धार्मिक-सामाजिक इतिहास का अध्ययन करने वाले पाठकों, शोधार्थियों तथा इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए तैयार किया गया है।

About the Author

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार, भारतीय सेना, इतिहासकार, शोधकर्ता और लेखक हैं। भारतीय सेना में दीर्घ सैन्य सेवा के पश्चात उन्होंने इतिहास, भारतीय धार्मिक परंपराओं, अयोध्या, वैष्णव बैरागी परंपरा, निम्बार्क संप्रदाय और भारतीय तीर्थ-परंपरा से जुड़े विषयों पर स्वतंत्र शोध एवं लेखन को अपना प्रमुख कार्य बनाया।

उनकी अब तक 20 पुस्तकें—9 हिंदी और 11 अंग्रेजी—प्रकाशित हो चुकी हैं। “सनातन अयोध्या खंड–2” उनकी 21वीं पुस्तक है।

उनकी शोध-पद्धति में मूल दस्तावेज, न्यायालयीन अभिलेख, सरकारी रिकॉर्ड, ऐतिहासिक ग्रंथ, प्रत्यक्ष साक्ष्य और मौखिक इतिहास का तुलनात्मक अध्ययन प्रमुख है। उनका प्रयास है कि इतिहास को किसी पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष के बजाय उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर पाठकों के सामने रखा जाए।

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार, भारतीय सेना | इतिहासकार | शोधकर्ता | लेखक
www.nareshswaminimbark.in

Book Details

Publisher: Sanatan Bhart
Number of Pages: 597
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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