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उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में शुरू हुई सीमा और राहुल की मासूम मोहब्बत, अपनों की ज़िद और तक़दीर के फ़ैसले के आगे बेबस हो गई। माँ-बाप की इज़्ज़त की खातिर सीमा ने किसी और का हाथ थाम तो लिया, लेकिन राहुल की तड़प ख़त्म न हुई। जब अतीत और वर्तमान आमने-सामने आए, तब शुरू हुई प्यार, इज़्ज़त और कर्तव्य (फर्ज़) की असली परीक्षा। क्या सीमा और राहुल अपने प्यार की खातिर मर्यादाओं को लांघेंगे, या फिर एक-दूसरे की ख़ुशी के लिए त्याग का रास्ता चुनेंगे?
'प्यार का फर्ज़'—सच्चे प्यार, समर्पण और परिपक्वता की एक अनकही दास्तान।
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