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एट योर कमांड (At Your Command) नेविल गोडार्ड की एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण रचना है, जो पहली बार 1939 में प्रकाशित हुई थी।
इस पुस्तक में नेविल गोडार्ड चेतना, “I AM” (मैं हूँ), विश्वास और कल्पना के संबंध को समझाते हैं। वे बताते हैं कि मनुष्य की चेतना में स्वीकार की गई अवस्था उसकी इच्छाओं की पूर्ति और जीवन के अनुभवों से किस प्रकार जुड़ी है। पुस्तक का मुख्य विचार यह है कि व्यक्ति को अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए केवल बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर रहने के बजाय, अपनी चेतना में उस अवस्था को स्वीकार करना चाहिए जिसे वह अनुभव करना चाहता है।
पुस्तक में गोडार्ड “I AM” की अवधारणा और ईश्वर के साथ उसके संबंध पर विशेष ध्यान देते हैं। वे बाइबिल के अंशों और शिक्षाओं की अपनी विशिष्ट मनोवैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करते हैं तथा समझाते हैं कि बाइबिल की भाषा और पात्रों को मनुष्य की चेतना और आंतरिक अनुभवों के संदर्भ में किस प्रकार समझा जा सकता है।
गोडार्ड इस रचना में विश्वास, कल्पना और आंतरिक स्वीकृति के महत्व को समझाते हुए बताते हैं कि इच्छा की पूर्ति की दिशा में व्यक्ति की चेतना में मौजूद धारणा और अवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे पाठक को अपनी आंतरिक अवस्था पर ध्यान देने और “I AM” की अवधारणा को अपनी शिक्षाओं के केंद्रीय आधार के रूप में समझने के लिए प्रेरित करते हैं।
यह संस्करण 1939 में प्रकाशित मूल अंग्रेज़ी पाठ का हिंदी अनुवाद है। इसमें मूल रचना के विचारों, संरचना और लेखन-शैली को यथासंभव सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है, ताकि पाठक नेविल गोडार्ड की शिक्षाओं को बिना अनावश्यक आधुनिक व्याख्याओं या अतिरिक्त विस्तार के पढ़ सकें।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो नेविल गोडार्ड की मूल रचनाओं को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं और चेतना, “I AM”, कल्पना, विश्वास, इच्छा की पूर्ति तथा बाइबिल की मनोवैज्ञानिक व्याख्या से संबंधित उनके विचारों को उनके मूल संदर्भ में समझना चाहते हैं।
मूल रचना: नेविल गोडार्ड (Neville Goddard)
मूल प्रकाशन: 1939
हिंदी अनुवाद: अवित बंसल (Avit Bansal)
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