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प्रेयर: द आर्ट ऑफ़ बिलीविंग (Prayer: The Art of Believing): हिंदी Translation
प्रेयर: द आर्ट ऑफ़ बिलीविंग (Prayer: The Art of Believing) नेविल गोडार्ड की एक संक्षिप्त लेकिन गहन रचना है, जो पहली बार 1945 में प्रकाशित हुई थी।
इस पुस्तक में नेविल गोडार्ड प्रार्थना, विश्वास, कल्पना और चेतना के बीच के संबंध को समझाते हैं। वे बताते हैं कि प्रार्थना केवल शब्दों में की गई विनती नहीं, बल्कि उस अवस्था को भीतर स्वीकार करना है जिसे हम अपने लिए सत्य मानना चाहते हैं।
इस रचना में गोडार्ड Imagination और Faith, Consciousness, Law of Reversibility, Thought Transmission और प्रार्थना की वास्तविक प्रकृति जैसे विषयों पर बात करते हैं। वे पाठक को अपने भीतर की भावना और विश्वास पर ध्यान देने की ओर ले जाते हैं।
यह संस्करण 1945 के मूल अंग्रेज़ी पाठ का हिंदी अनुवाद है। इसमें मूल रचना के विचारों और सीधे स्वर को बनाए रखने का प्रयास किया गया है, ताकि पाठक नेविल गोडार्ड की शिक्षाओं को बिना अनावश्यक आधुनिक व्याख्या या विस्तार के पढ़ सकें।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो नेविल गोडार्ड की मूल रचनाओं को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं और Prayer, Faith, Imagination और Consciousness पर उनके विचारों को उनके मूल संदर्भ के साथ समझना चाहते हैं।
मूल रचना: नेविल गोडार्ड (Neville Goddard)
मूल प्रकाशन: 1945
हिंदी अनुवाद: अवित बंसल (Avit Bansal)
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