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फीलिंग इज़ द सीक्रेट (Feeling Is the Secret) नेविल गोडार्ड की एक संक्षिप्त लेकिन गहन रचना है, जो पहली बार 1944 में प्रकाशित हुई थी।
इस पुस्तक में नेविल गोडार्ड इच्छा की पूर्ति और चेतना के नियम को समझाते हैं। वे बताते हैं कि हमारी चेतना में स्वीकार की गई अवस्था और उससे जुड़ी भावना किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुस्तक का मुख्य विचार यह है कि किसी इच्छा को केवल सोचने के बजाय, उसके पूरा हो जाने की भावना को स्वीकार करना और उस अवस्था के साथ स्वयं को जोड़ना महत्वपूर्ण है।
पुस्तक में गोडार्ड चेतन और अवचेतन मन के संबंध, भावना और विचारों के प्रभाव, नींद की अवस्था तथा प्रार्थना की प्रकृति पर चर्चा करते हैं। वे विशेष रूप से उस समय पर ध्यान देते हैं जब व्यक्ति सोने जा रहा होता है और बताते हैं कि इच्छा के पूरा हो जाने की भावना के साथ सोना किस प्रकार उनकी पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रार्थना पर चर्चा करते हुए गोडार्ड प्रार्थना को केवल किसी इच्छा के लिए विनती करने के रूप में नहीं, बल्कि उस इच्छा को पहले से पूरा हुआ मानकर उसके अनुरूप भावना को स्वीकार करने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करते हैं। अंतिम अध्याय में वे भावना और आत्म-अवस्था के संबंध को और स्पष्ट करते हैं।
यह संस्करण 1944 में प्रकाशित मूल अंग्रेज़ी पाठ का हिंदी अनुवाद है। इसमें मूल रचना के विचारों, संरचना और सीधे स्वर को बनाए रखने का प्रयास किया गया है, ताकि पाठक नेविल गोडार्ड की शिक्षाओं को बिना अनावश्यक आधुनिक व्याख्या या विस्तार के पढ़ सकें।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो नेविल गोडार्ड की मूल रचनाओं को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं और चेतना, भावना, इच्छा की पूर्ति, नींद, प्रार्थना और अवचेतन मन से संबंधित उनके विचारों को उनके मूल संदर्भ के साथ समझना चाहते हैं।
मूल रचना: नेविल गोडार्ड (Neville Goddard)
मूल प्रकाशन: 1944
हिंदी अनुवाद: अवित बंसल (Avit Bansal)
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