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बातें जो कहनी थीं मुझे

एक शायर का सफ़रनामा
NIKKA HKR
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹242 + shipping
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Description

बातें जो कहनी थीं मुझे
एक शायर का सफ़रनामा
लेखक: NIKKA HKR
क्या हर अधूरी मोहब्बत सच में खत्म हो जाती है, या वह शब्दों में ज़िंदा रहती है?
"बातें जो कहनी थीं मुझे" सिर्फ़ कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक ऐसे दिल का सफ़र है जिसने मोहब्बत, जुदाई, वफ़ा, तन्हाई, समाज और खुद की तलाश को बहुत करीब से महसूस किया है।
इस पुस्तक की हर रचना एक कहानी कहती है—कहीं पहली बारिश की याद है, कहीं अधूरेपन का दर्द, कहीं अपने ही समाज से लड़ते इंसान की आवाज़, तो कहीं एक ऐसे आशिक़ की दास्तान जो खोकर भी मोहब्बत से इनकार नहीं कर पाता।
सरल शब्दों में लिखी गई ये कविताएँ और शायरी पाठक को अपने अनुभवों से जोड़ती हैं और उसे अपने ही दिल के अनकहे जज़्बातों से रूबरू कराती हैं।
यदि आपको प्रेम, विरह, आत्मचिंतन और भावनात्मक शायरी पसंद है, तो यह पुस्तक आपके लिए है।
इस पुस्तक में आपको मिलेगा:
प्रेम और विरह पर आधारित रचनाएँ
वफ़ा, अधूरेपन और तन्हाई की कहानियाँ
समाज और रिश्तों पर गहरे विचार
दिल को छू लेने वाली शायरी और कविताएँ
एक शायर की भावनात्मक यात्रा
"कुछ बातें कही जाती हैं, कुछ लिखी जाती हैं... और कुछ हमेशा दिल में रह जाती हैं।"

About the Author

निक्का एच.के.आर. (Nikka HKR) एक संवेदनशील लेखक और कलाकार हैं, जो शब्दों की दुनिया में भावनाओं को पिरोने का हुनर रखते हैं। वे मानते हैं कि हर इंसान के भीतर कुछ अनकही बातें, कुछ दबी हुई यादें और कुछ अनसुलझी खामोशियां होती हैं, जिन्हें व्यक्त करना बहुत जरूरी है।
अपनी पहली पुस्तक 'बातें जो कहनी थीं मुझे (एक शायर का सफ़रनामा)' के माध्यम से, निक्का उन खामोशियों को एक नई आवाज़ देने की कोशिश कर रहे हैं। यह किताब उन तमाम बातों का संग्रह है जो हम अक्सर अपनों से कहना चाहते थे, लेकिन कह नहीं पाए। यह उन यादों का आईना है जो आज भी हमारे भीतर जिंदा हैं।

Book Details

Publisher: NIKKA HKR
Number of Pages: 176
Dimensions: 5.83"x8.27"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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