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पुस्तक का नाम: समय से बाहर (पाँच बजकर तैंतालीस मिनट)
विधा (Genre): दार्शनिक उपन्यास / हिंदी साहित्य संक्षिप्त कथा (Synopsis):
हर मनुष्य के जीवन में एक ऐसा कोना होता है जहाँ घड़ी की सुइयाँ चलना बंद कर देती हैं—चाहे वह किसी की प्रतीक्षा में हो, किसी अपने को खोने के आघात में हो, या युद्ध के किसी ऐसे मोर्चे पर जहाँ साँसें और वक्त दोनों बंधक बन जाते हैं। यह उपन्यास है अर्जुन का, जो सरहद की बारूदी खाइयों और कालकोठरी की सीलन के बीच महज़ एक सैनिक नहीं, बल्कि अपनी स्मृतियों और अपनों के इंतज़ार को ज़िंदा रखने वाला एक साधारण इंसान है। और यह कहानी है मीरा की, जो गाँव की उस कच्ची डगर और चौखट पर अकेली खड़ी, समय के पहियों को अपनी निष्ठा और एक अदृश्य डोर से थामे रखती है। जब अर्जुन की कलाई पर रुकी हुई पुरानी HMT घड़ी और उसकी जेब में सिकुड़ी हुई चार पंक्तियों की वह चिट्ठी इतिहास और वर्तमान को आपस में जोड़ती है, तो यह कहानी सरहदों और फासलों के परे इंसानी संवेदनाओं, प्रेम और विश्वास की एक अनूठी और गहरी दार्शनिक यात्रा बन जाती है।
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