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कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में आते हैं और हमारे भीतर एक पूरी दुनिया बसा जाते हैं।
‘बाक़ी तुम’ उन एहसासों का संग्रह है, जिन्हें लोग अक्सर जीते तो हैं, लेकिन कह नहीं पाते।
प्रेम के पहले एहसास से लेकर प्रतीक्षा, दूरी, कमी और अनकहे पछतावों तक, यह कविता-संग्रह उन सभी भावनाओं को शब्द देता है, जो किसी के चले जाने के बाद भी हमारे भीतर बाक़ी रह जाती हैं।
सात भागों में फैली 106 कविताओं के माध्यम से यह किताब प्रेम के अलग-अलग रंगों से गुज़रती है। कभी किसी की याद में ठहरती है, कभी बिछड़ने के दर्द को महसूस करती है, तो कभी ख़ुद की ओर लौटने और प्रेम से परे जीवन को समझने की कोशिश करती है।
यह किताब उन लोगों के लिए है, जिन्होंने किसी को दिल से चाहा है, किसी का इंतज़ार किया है या किसी ऐसे एहसास को अपने भीतर सँभालकर रखा है, जिसे कभी कह नहीं पाए।
क्योंकि कभी-कभी कोई इंसान चला जाता है, लेकिन उसके जाने के बाद भी बहुत कुछ बाक़ी रह जाता है।
और कभी-कभी, बाक़ी सिर्फ़ तुम रह जाते हो।
लेखक: R. S. Sharma
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