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काकभुशुण्डि

राम के साक्षी अमर महर्षि की अनकही कथा
Ram Gunjal
Type: Print Book
Genre: Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹309 + shipping
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Description

नीलगिरि की शीतल छाया में, बरगद की प्राचीन शाखों तले सत्ताईस कल्पों से वही एक कौआ प्रभु श्रीराम की कथा सुनाता आ रहा है।

फिर एक ढलती साँझ वहाँ स्वयं पक्षीराज गरुड़ का आगमन होता है, जो श्रीहरि के वाहन हैं। समरांगण में राघव को नागपाश से घिरा देख उनके चित्त में संशय का बीज अंकुरित हुआ—क्या सर्पबंध में बँधने वाला भी परात्पर ब्रह्म हो सकता है? देवर्षि नारद और प्रजापति ब्रह्मा भी उनकी शंका का निवारण न कर सके, तब महादेव ने उन्हें इसी काक के द्वार भेज दिया।

अविराम दो रात्रियों और एक दिवस तक काकभुशुण्डि की दिव्य वाणी प्रवाहित होती है। वे अवधपुरी के उस पावन प्रांगण का स्मरण करते हैं, जहाँ शिशु राघव के हस्त से गिरे तंदुल-कण चुगने का सौभाग्य उन्हें प्राप्त हुआ; उस अलौकिक क्षण की गाथा सुनाते हैं, जब बाल रूप श्रीराम के विवृत मुख में प्रवेश कर उन्होंने अगणित ब्रह्मांडों का दर्शन किया; उज्जयिनी के उस उच्छृंखल युवा की कथा कहते हैं, जिसने अपने पूज्य गुरुदेव के आगमन पर अभिमानवश प्रणाम तक न किया; तथा महर्षि लोमश के उस दारुण शाप का वर्णन करते हैं, जिसने उन्हें वायस रूप प्रदान करके परमात्मा के और अधिक सन्निकट ला बिठाया।

श्रीरामचरितमानस के पावन उत्तरकाण्ड पर आधारित यह अमर कृति काकभुशुण्डि को उन्हीं के ओजस्वी स्वर में मुखरित होने का अवसर प्रदान करती है। इसमें ज्ञान रूपी दीपक, भक्ति रूपी अलौकिक मणि, सात गूढ़ प्रश्न तथा मानस रोगों एवं उनके सटीक उपचार का विस्तृत निरूपण है; वे समस्त उत्तर जो पक्षीराज को प्राप्त हुए थे, आज आपके संशय-निवारण हेतु यहाँ संकलित हैं।

आसन ग्रहण कीजिए; नीलगिरि का वह दिव्य वायस अब रामकथा का प्रवाह प्रारंभ करने को है।

About the Author

राम गुंजाल की लेखनी साधना-भूमि से स्पंदित होती है। तंत्र, ध्यान तथा योग-अनुशासन विषयक उनकी कृतियाँ दीर्घकालीन प्रत्यक्ष अभ्यास से उपजी हैं। वे विशेष रूप से उन्हीं अध्येताओं के लिए लिखते हैं जो सैद्धांतिक ज्ञान को निज जीवन में उतारने के लिए संकल्पित हैं।

“काकभुशुण्डि” की रचना नवीन प्रयोग होने के साथ-साथ अपनी मौलिक चेतना में समाहित होने का सुअवसर है। उनके अंतरसंसार में वर्षों तक वही जिज्ञासा स्पंदित होती रही, जिसे कभी जगज्जननी पार्वती ने देवाधिदेव शिव के समक्ष प्रस्तुत किया था: श्रीराम वास्तव में कौन हैं—अयोध्यापति राजा दशरथ के पुत्र अथवा सर्वव्यापी निराकार ब्रह्म? श्रीरामचरितमानस के सतत अनुशीलन एवं गहन चिंतन के पश्चात् वह संशय पूर्णतः तिरोहित हो गया। तत्पश्चात् केवल अनन्य एवं निष्काम भक्ति ही अवशिष्ट रही, जो एक बार अंकुरित होकर अंतःकरण को त्यागती नहीं। पक्षिराज गरुड़ को मानस-गाथा सुनाने वाले काकभुशुण्डि को पुनः इस आख्यान का माध्यम बनाने का यह सूक्ष्म अनुष्ठान है, जिसकी प्रामाणिक नींव केवल रामचरितमानस ही है।

उनकी प्रमुख रचनाओं में डिवाइन फेमिनिन तंत्र शृंखला (जिसके अंतर्गत “तारा तंत्र फॉर बिगिनर्स” अंतर्निहित है), “काली तंत्र फॉर बिगिनर्स”, “सिद्धि: अनलॉकिंग हिडन पावर्स”, “परकाया प्रवेश: द फॉरगॉटेन योगिक साइंस ऑफ एंटरिंग अनदर्स बॉडी” एवं “अवेकन योर थर्ड आई इन 6 वीक्स” विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन समस्त ग्रंथों में एक ही अंतःसूत्र स्पंदित होता है: बौद्धिक व्याख्या से पूर्व साधना, तथा अंधविश्वास के स्थान पर प्रत्यक्ष अनुभूति।
उनकी पुस्तकें अम्बे शिवम पब्लिकेशन से प्रकाशित होती हैं।

ईमेल: me@ramgunjal.com

Book Details

Publisher: Ambe Sivam Publication
Number of Pages: 257
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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