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क्या आप अपनी ज़िंदगी से पूरी तरह संतुष्ट हैं? या आपको लगता है कि आप इससे कहीं बेहतर कर सकते हैं?
हम सब बड़े सपने देखते हैं, सफलता चाहते हैं और अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। लेकिन अक्सर डर, समाज का दबाव और खुद पर भरोसे की कमी हमें रोक देती है। हम बाहर की दुनिया में रास्ते खोजते रहते हैं, जबकि असली रुकावट हमारे 'भीतर' होती है।
'जीवन कैसे जिएं' कोई जादुई मंत्र नहीं, बल्कि एक सच्चा साथी है जो आपको सिखाएगी:
अपने डर को हिम्मत में कैसे बदलें?
नकारात्मक विचारों (Negative Thoughts) के चक्रव्यूह से कैसे निकलें?
छोटी-छोटी आदतों से बड़ी सफलता कैसे हासिल करें?
और सबसे ज़रूरी—खुद को कैसे पहचानें?
यह किताब उन सभी के लिए है जो भीड़ का हिस्सा नहीं, बल्कि भीड़ की वजह बनना चाहते हैं। सिर्फ पन्ने मत पलटिए, अपनी ज़िंदगी बदलिए। आज ही शुरुआत करें!
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