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जरूरतें ( Zarurtein )

मनुष्य के भीतर छिपी इच्छाओं, कमियों, प्रेम, वासना और जीवन की सच्चाइयों की एक बेबाक यात्रा
Rj sukhi
Type: Print Book
Genre: Self-Improvement, Magazine/Periodical
Language: English, Hindi
Price: ₹283 + shipping
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Description

ज़रूरतें

जो हम चाहते हैं, उसके पीछे छिपी हुई असली कहानी

मनुष्य की ज़िंदगी इच्छाओं से भरी हुई है।
कोई प्रेम चाहता है, कोई पैसा, कोई सफलता, कोई सम्मान; कोई शरीर की निकटता चाहता है, कोई सेक्स, कोई अपनापन और कोई केवल इतना चाहता है कि कोई उसे सच में समझ सके।

लेकिन क्या हम हमेशा जानते हैं कि हमें वास्तव में चाहिए क्या?

“ज़रूरतें” मनुष्य की उन्हीं दिखाई देने वाली और छिपी हुई जरूरतों की गहरी यात्रा है—जहाँ प्रेम और आकर्षण, Lust और Love, वासना और भावनात्मक आवश्यकता, सेक्स और अंतरंगता, पैसा और सुरक्षा, सफलता और पहचान, सम्मान और अहंकार, अकेलापन और अपनापन जैसे विषयों को सीधे और स्पष्ट रूप से समझने का प्रयास किया गया है।

यह पुस्तक इच्छाओं को केवल सही या गलत की श्रेणी में रखने के बजाय उनके पीछे छिपे मनोविज्ञान को देखने का प्रयास करती है।

क्यों हमें किसी की जरूरत महसूस होती है?

क्यों कभी शरीर कुछ चाहता है और मन कुछ और?

क्यों प्रेम मिलने के बाद भी मन किसी और चीज़ की तलाश करता है?

क्यों पैसा बढ़ने के साथ इच्छाएँ भी बढ़ती जाती हैं?

क्यों कुछ लोग सफलता के शिखर पर पहुँचकर भी भीतर से खाली महसूस करते हैं?

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या हमारी हर इच्छा वास्तव में हमारी अपनी है, या उनमें से कुछ इच्छाएँ समाज, परिस्थितियों, डर और अधूरेपन ने हमारे भीतर पैदा की हैं?

यह पुस्तक केवल इच्छाओं की कहानी नहीं है।

यह मनुष्य को स्वयं समझने की कोशिश है।

यहाँ प्रेम है, आकर्षण है, वासना है, सेक्स है, रिश्ते हैं, पैसा है, महत्वाकांक्षा है, अकेलापन है, सामाजिक दबाव है, नैतिकता है, स्वतंत्रता है और जीवन के वे प्रश्न भी हैं जिनसे हम अक्सर बचते रहते हैं।

क्योंकि—

> हर चाहत के पीछे एक ज़रूरत हो सकती है,
और हर ज़रूरत के पीछे एक कहानी।

“ज़रूरतें” उन लोगों के लिए है जो केवल जीना नहीं, बल्कि यह समझना चाहते हैं कि वे जैसा जी रहे हैं—उसके पीछे आखिर क्यों है।

About the Author

Rj Sukhi

Rj Sukhi एक शिक्षक, लेखक और विचारक हैं, जिनकी लेखनी शिक्षा के साथ-साथ मनुष्य, समाज, जीवन और उसके भीतर चलने वाले संघर्षों को समझने की कोशिश करती है।

वे अपने लेखन में उन विषयों को सामने लाने का प्रयास करते हैं जिन पर समाज अक्सर बात तो करता है, लेकिन खुलकर समझने से बचता है।

“ज़रूरतें” में उनका प्रयास मनुष्य की इच्छाओं और आवश्यकताओं को किसी एक नैतिक निष्कर्ष में बाँधना नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और मानवीय पहलुओं को सामने रखना है।

प्रेम, आकर्षण, वासना, सेक्स, रिश्ते, पैसा, सफलता, सम्मान, अकेलापन और आत्म-पहचान जैसे विषयों के माध्यम से वे पाठक को एक ऐसे प्रश्न तक ले जाना चाहते हैं—

“मैं वास्तव में चाहता क्या हूँ?”

Rj Sukhi का विश्वास है कि शिक्षा केवल किताबों में मौजूद जानकारी का नाम नहीं है; स्वयं को समझना भी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वे शिक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभव के साथ लेखन को भी एक माध्यम मानते हैं—ऐसा माध्यम जो पाठक को केवल उत्तर न दे, बल्कि अपने भीतर प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करे।

Rj Sukhi
Teacher • Author • Thinker

Book Details

Publisher: Awadh Scholars Publications
Number of Pages: 217
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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