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यह पुस्तक केवल यह कहने के लिए नहीं लिखी गई कि—
“Fast Food मत खाइए।”
बल्कि इसका मूल प्रश्न इससे कहीं बड़ा है—
“हमारी food choices आखिर बनती कैसे हैं?”
जब स्वाद, आदत, विज्ञापन, सुविधा, समय, पैसा, social media और lifestyle एक साथ हमारी पसंद को प्रभावित करते हैं, तब भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं रह जाता।
वह हमारी जीवनशैली और संस्कृति का हिस्सा बन जाता है।
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लक्षित पाठक
यह पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है—
• विद्यार्थियों के लिए
• युवाओं के लिए
• अभिभावकों के लिए
• शिक्षकों के लिए
• सामान्य पाठकों के लिए
• स्वास्थ्य और lifestyle में रुचि रखने वालों के लिए
• आधुनिक food culture को समझने वाले पाठकों के लिए
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