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"मेरे हिस्से की मोहब्बत" एक ऐसी दास्तान है जो इंदौर की एक शाम से शुरू होती है और वृंदावन की कुंज-गलियों तक जाती है। यह किताब एक नादान आशिक़ की वो सच्ची कहानी है जिसमें पहली नज़र का जादू है, नीम के पेड़ तले की खामोशी है, एक अनभेजा ख़त है — और एक "Good Bye" है जो आज भी सीने में धड़कती है। 25 अध्यायों में prose और poetry का संगम, और एक BONUS chapter जो पूरी कहानी को ज़िंदा कर देता है।
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