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‘खुशी के पल’ में बच्चों की पूरी दुनिया बंद है। जंगल के जानवर हों या शरीर के अंग, मिट्टी के बर्तन हों या प्यारे-प्यारे रिश्ते - लगभग हर विषय पर एक सरल और सुंदर कविता इस संग्रह में है। शालू की कविताएँ जहाँ एक ओर मनोरंजक हैं तो वहीं दूसरी ओर ज्ञानवर्धक भी। ‘खुशी के पल’ एक विकलांग बच्ची का अद्भुत प्रयास है। इसे इसके सही मुकाम तक पहुँचाना हम सबका कर्तव्य है और मानवता की परम सेवा।
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