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Swarthi Sagar Bajrangi

स्व: की खोज और ध्यान का चमत्कार
Sagar Bajrangi
Type: Print Book
Genre: Self-Improvement, Philosophy
Language: Hindi
Price: ₹350 + shipping
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Description

पुस्तक परिचय: स्वार्थी
लेखक: प्रजापति सागर बजरंगी
विधा: अध्यात्म, चेतना, दर्शन और आत्म-खोज
ग्रंथ का सार और दर्शन
जब मनुष्य इस संसार में आँख खोलता है, तो वह सबसे पहले भीड़ की चाल में चलना सीखता है। समाज उसे सिखाता है कि क्या सही है, क्या गलत है, किसे भगवान मानना है और किस डर में जीना है। इस पूरी दौड़ में वह अपने ही वजूद से पूरी तरह अजनबी हो जाता है। समाज जिसे 'स्वार्थी' कहकर डराता है, असल में वही 'स्वार्थ' जब अपनी आत्मा की मुक्ति की ओर मुड़ता है, तब वह सबसे बड़ा धर्म बन जाता है।
यह ग्रंथ 'स्वार्थी' पारंपरिक नैतिकता या उपदेशों की कोई सूखी किताब नहीं है। यह लेखक प्रजापति सागर बजरंगी की वह क्रांतिकारी महाघोषणा है, जो मनुष्य को भीड़ की गुलामी, मानसिक पाखंड और भविष्य के भय से हमेशा के लिए मुक्त कराने का मार्ग दिखाती है। यह पुस्तक आपको बाहर की दुनिया में सत्य खोजने के भटकाव से खींचकर आपके अपने भीतर के साम्राज्य की ओर लौटाती है।
पुस्तक के प्रमुख आयाम
मुखौटों और पाखंड पर प्रहार: समाज ने इंसान को जिन झूठे संस्कारों और डरों में जकड़ रखा है, यह पुस्तक उन पर गहरी चोट करती है और सिखाती है कि कैसे अपने प्रति प्रामाणिक होना ही जीवन का पहला सत्य है।
'मानने' से 'जानने' की यात्रा: यह ग्रंथ किसी की कही हुई बातों को आँख बंद करके मानने के बजाय, जीवन को खुद जीने, अनुभव करने और अपने भीतर झाँकने की प्रेरणा देता है।
ध्यान का महाविज्ञान (ध्यान सूत्र): पुस्तक का अंतिम खंड मन के कोलाहल को शांत करने, शरीर को शिथिल करने और ध्यान की अगाध गहराइयों में उतरने की एक सटीक आंतरिक विधि प्रदान करता है।
आलय विज्ञान और जाति स्मरण: चेतना की अनंत परतों को चीरकर, भविष्य की दौड़ को तोड़कर और अपने पूर्व जन्मों की स्मृतियों (जाति स्मरण) के रहस्यों को उजागर करने का एक दुर्लभ और दार्शनिक संकलन।
पाठकों के लिए लेखक का संदेश
यदि आप भीड़ का हिस्सा बनकर भीड़ में ही खो जाना नहीं चाहते, बल्कि अपने भीतर छिपे उस सोए हुए सम्राट को जगाना चाहते हैं जो जन्म और मृत्यु के हर बंधन से मुक्त है—तो यह पुस्तक आपके लिए एक अनिवार्य और अमूल्य मार्गदर्शक है।
इस ग्रंथ को केवल पढ़िए मत—इसे अपने भीतर उतरने दीजिए, ताकि आप जीवन को उसके वास्तविक और परम सौंदर्य में जान सकें।

About the Author

लेखक परिचय
प्रजापति सागर बजरंगी
प्रजापति सागर बजरंगी एक युवा, प्रखर और क्रांतिकारी दार्शनिक, विचारक तथा हिंदी साहित्य के एक ऐसे हस्ताक्षर हैं जिनकी चेतना पारंपरिक रूढ़ियों और भीड़ की चाल से कोसों दूर, सत्य की सीधी खोज में लीन है। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के मैनापुथी गाँव से अपनी इस आंतरिक यात्रा का विस्तार करने वाले सागर जी का लेखन किसी दार्शनिक ग्रंथ या अकादमिक सिद्धांत से नहीं, बल्कि जीवन के सीधे अनुभव और अंतस की गहराइयों से उपजा है।
समाज ने मनुष्य को जन्म से ही जिन मान्यताओं, डरों और पाखंडों की बेड़ियों में जकड़ रखा है, यह लेखक उनके खिलाफ एक मुखर आवाज बनकर उभरता है। उनका यह स्पष्ट दृष्टिकोण है कि मनुष्य को उधार के ज्ञान यानी 'मानने' की बीमारी से मुक्त होकर, अपने भीतर उतरकर 'जानने' के मार्ग पर चलना चाहिए।
उनकी रचनाओं में आचार्य रजनीश ओशो के दर्शन की वह गहराई, तीखापन और पारदर्शिता साफ झललती है जो पाठक के सोए हुए चित्त को झकझोर कर जगा देती है। उनकी यह कृति 'स्वार्थी' केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए एक महाघोषणा है जो भीड़ में खो जाने के बजाय अपने भीतर के सम्राट को खोजना चाहता है।

Book Details

Number of Pages: 200
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Hard Cover (Case Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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