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क्या आप हर किसी को खुश रखने की कोशिश करते-करते खुद को भूल चुके हैं?
"सबको खुश करने की सज़ा" एक ऐसी पुस्तक है जो बताती है कि दूसरों की स्वीकृति पाने की आदत कैसे धीरे-धीरे हमारे आत्मसम्मान, मानसिक शांति और पहचान को खत्म कर देती है।
वास्तविक जीवन के उदाहरणों, मनोवैज्ञानिक तथ्यों और सरल भाषा के माध्यम से यह पुस्तक आपको "ना" कहना, स्वस्थ सीमाएँ बनाना और अपनी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जीना सिखाती है।
अगर आप अपनी खुशी को दूसरों की अपेक्षाओं से ऊपर रखना सीखना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।
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