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अयाय 1
खामोशी का आदमी
कभी
उह
कभी कुछ चेहरे ऐसे होते ह
ने िजंदगी को बहत पास से देखा है।
िजह
देखकर लगता है िक
उनक आँख म शद नह होते, लेिकन कहािनयाँ भरी होती ह।
हबर का चेहरा भी ऐसा ही था।
उसक उ चालीस के आसपास रही होगी
लकर
िकसी बूढ़े आदमी जैसी लगती थ
, लेिकन उसके
माथे क
। आँख गहरी थ, जैसे िकसी
पुराने कुएँ का पानी
—
शांत
,
मगर अंदर बहत कुछ िछपाए ह
ए।
1
िजस शहर से वह आया था, वहाँ कोई उसे ठीक से जानता नह था।
और जहाँ वह अब जा रहा था,
कभी
कभी इंसान
वहाँ भी कोई उसे पहचानता नह था।
खुद ही अपना अजनबी बन जाता है।
बस धीरे-धीरे कची सड़क पर चल रही थी। िखड़क के पास बैठा हबर
बाहर देख रहा था।
पेड़ पीछे भाग रहे थे। आसमान धीरे-धीरे रंग बदल रहा था।
क आँख म कोई हरकत नह थी।
लेिकन हबर
जैसे उसके अंदर का समय बह
पहले
क चुका हो।
बस एक छोटे से गाँव के पास आकर क गई।
कंड
टर ने आवाज लगाई
—
“िजसे रािवरा उतरना है, उतर जाए।”
हबर ने िसर उठाया।
वही जगह थी।
वह धीरे-धीरे बस से उतरा।
उसके जूत
के नीचे धूल उठी।
त
2
गाँव बह
त शांत था।
इतना शांत िक दूर से िकसी बत
आवाज भी साफ सुनाई दे
रही थी।
हबर ने चार
तरफ देखा।
अजीब-सी उदासी।
ऐसा लगता था जैसे यहाँ लोग रहते तो ह,
थोड़ी दूर एक पुराना बरगद का पेड़ था।
बैठा था।
उसक दाढ़ी सफेद थी और आँख बह
खड़ा हो गया।
बूढ़े ने उसे देखा और धीमे से मु
“नए हो यहाँ?”
हबर ने हका-सा िसर िहलाया।
“हाँ।”
“नाम?”
“हबर ।”
बूढ़ा कुछ पल तक उसे देखता रहा।
न के िगरने क
छोटे-छोटे घर, िम ी क दीवार, और हवा म
पर हँसना भूल चुके ह
।
उसके नीचे एक बूढ़ा आदमी
त शांत।
हबर उसके पास जाकर
कराया।
3
िफर बोला—
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