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उधार की परछाईं

Sangam Krishnaa
Type: Print Book
Genre: Science Fiction & Fantasy
Language: Hindi
Price: ₹385 + shipping
This book ships within India only.
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Description

रेवाखंड में सुबह सबसे पहले पानी जागता है। घाट की सीढ़ियों पर निशान-पत्थर खड़ा है, और पहली बाढ़ की रात अब केवल ग्यारह दिन दूर।

इरावती बही-घर की रखवाली है। उसके पास पिता की छोड़ी परछाईं-बही है, जिसमें हर उधार लिखा जाता है - और इस शहर में उधार पैसे का नहीं, परछाईं का होता है। एक रात या एक मौसम के लिए उधार ली गई परछाईं लौटनी बाक़ी रह जाए, तो वह कहाँ रहती है, यह बही के कटे पन्ने जानते हैं।

फिर शहर में वह आता है जिसकी दोपहर में परछाईं नहीं होती। तहसील का नक्शा, बंद संदूक, बाईस नामों वाली सूची, और नदी के बीच एक डूबा हुआ गाँव - इरावती को पहली बार अपनी बही के उन पन्नों को खोलना है जिन्हें पिता ने कभी खोलने का साहस नहीं किया।

उधार की परछाईं भरोसे, हिसाब और पूछने की हिम्मत की कथा है। कुछ लेखे चुकाने से नहीं, पूछने से तय होते हैं।

About the Author

संगम कृष्णा हिंदी और अंग्रेज़ी में उपन्यास लिखते हैं। वे लिखते हैं क्योंकि उन्हें लिखना प्रिय है। इस प्रेम के पीछे कोई दूसरी वजह ढूँढना ज़रूरी नहीं। उन्हें वह शांत घड़ी अच्छी लगती है जब कोई दृश्य अभी शुरू होने वाला होता है, जब कोई पात्र बिना बुलाए मन में आकर बैठ जाता है और जाने से इन्कार कर देता है। बहुत से शब्दों के बीच एक सही शब्द मिल जाने की छोटी खुशी भी उन्हें बार-बार लिखने की मेज़ तक लौटा लाती है।

इसी प्रेम से ये किताबें जन्म लेती हैं, और इसी के सहारे पाठकों तक पहुँचती हैं। वे उस तरह लिखते हैं जैसे कोई अपने काम में डूबा हुआ धीरे-धीरे गुनगुनाता है। कहानी भीतर पहले से चल रही होती है; उसे कागज़ पर उतारे बिना रहा नहीं जाता। यदि उनके किसी पन्ने ने किसी लंबी शाम में आपका साथ दिया है, किसी अकेले पल को थोड़ा हल्का किया है, तो लिखने के इस प्रेम ने अपना काम कर दिया। पढ़ने के लिए धन्यवाद।

Book Details

Publisher: Self-published
Number of Pages: 417
Dimensions: 5"x8"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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