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एक मत। बस एक मत की कमी।
राजपुर की विधानसभा में शनिवार की दोपहर गिनती पूरी होती है, और नतीजा बहुमत से एक कम पर ठहर जाता है।
नकुल सत्ता के इतने पास रहा है कि जानता है, काग़ज़ कैसे बनते हैं और कैसे गुम हो जाते हैं। पर जब एक बंद लॉकर, एक लाल डायरी और कुछ अनजान संदेश उसके सामने आते हैं, तो उसे समझ आता है कि जाँचना भी एक जोखिम है।
कौन चुप है, किसे चुप कराया गया, और गिनती के पीछे कौन खड़ा है?
सवाल बहुत हैं। जवाब मुहरबंद लिफ़ाफ़ों में हैं, और लिफ़ाफ़े आसानी से नहीं खुलते।
एक राजनीतिक थ्रिलर, जो आख़िरी पन्ने तक जगाए रखेगी।
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