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"संघर्ष की स्याही" सानिया ख़ान की एक बेहद भावुक, सच्ची और प्रेरणादायक आत्मकथा है। उज्जैन और शाजापुर की गलियों से शुरू हुई यह कहानी समाज की रूढ़ियों को तोड़कर स्काउट गाइड में प्लाटून को लीड करने, 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पूरे परिवार की तपस्या, गंभीर बीमारी से लड़कर लैब असिस्टेंट बनने और सवित्रा फ़ाउंडेशन के साथ सोशल वर्क करने तक के अद्भुत सफर को बयां करती है। जब ज़िंदगी के थपेड़ों और अकेलेपन ने परीक्षा ली, तब गुरुजनों के आशीर्वाद और माता-पिता के स्वाभिमानी संस्कारों ने 'मॉम' (सानिया) को एक नई पहचान दी। यह किताब उन सभी लड़कियों के लिए एक आईना है जो खुद को कमज़ोर समझती हैं या हालातों से हारने लगी हैं। यह सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि खुद की खोज, पारिवारिक त्याग, गुरु-शिष्य के अनमोल रिश्ते और अंधेरे से उजाले की तरफ़ बढ़ने का वो हौसला है जो सिखाएगा कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, कभी झुकना नहीं है।
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