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जीवन का सही रास्ता क्या है?

श्रीमद्भगवद्गीता से मार्गदर्शन
SANJAY KUMAR SRIVASTAVA
Type: Print Book
Genre: Philosophy, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹211 + shipping
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Description

जीवन का सही रास्ता क्या है?

क्या जीवन में सफलता केवल धन, पद और भौतिक सुविधाओं से मिलती है? या एक शांत, संतुलित और सार्थक जीवन के लिए कोई सही मार्ग भी है?

“जीवन का सही रास्ता क्या है?” श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरित एक सरल और व्यावहारिक पुस्तक है। इसमें जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को सहज भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक में श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं के माध्यम से समझाया गया है कि मनुष्य अपने जीवन में सही और गलत आचरण को कैसे पहचान सकता है, काम, क्रोध, लोभ, अहंकार और मोह जैसी प्रवृत्तियों से कैसे सावधान रह सकता है तथा आत्मसंयम, विवेक और सदाचार के माध्यम से जीवन में शांति और संतुलन कैसे विकसित कर सकता है।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अपने जीवन में सही निर्णय, आत्मसंयम, सदाचार, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

पुस्तक का उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता के गहन दर्शन को कठिन भाषा में प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उसके जीवनोपयोगी संदेशों को सरल हिंदी में समझने और दैनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास करना है।

जीवन का सही रास्ता हमारे विचारों, निर्णयों और आचरण से बनता है।

About the Author

संजय कुमार श्रीवास्तव एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ विद्युत क्षेत्र अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने व्यावसायिक जीवन का महत्वपूर्ण समय Power Grid Corporation of India Limited (POWERGRID) में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए व्यतीत किया। इससे पूर्व उन्होंने NTPC में भी अपनी सेवाएँ दीं और विद्युत क्षेत्र की परियोजनाओं एवं कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किए। उनके व्यावसायिक जीवन में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, जिम्मेदारी, टीम भावना और निरंतर सीखने की भावना का विशेष महत्व रहा है।
व्यावसायिक जीवन के अनुभवों के साथ-साथ लेखक की रुचि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चिंतन, नैतिक मूल्यों और श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन में रही है। उनके विचार में मनुष्य का जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों, पद और आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। जीवन की वास्तविक गुणवत्ता इस बात से भी निर्धारित होती है कि व्यक्ति अपने निर्णय किस आधार पर लेता है, अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का किस प्रकार पालन करता है तथा अपने विचारों और व्यवहार को किस प्रकार सही दिशा देता है।
इसी चिंतन से प्रेरित होकर लेखक ने श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 16, श्लोक 23 और 24 के संदेश को आधुनिक जीवन के संदर्भ में समझने और सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। श्लोक 23 में भगवान श्रीकृष्ण शास्त्रविधि की उपेक्षा करके मनमाने ढंग से आचरण करने के परिणामों की ओर संकेत करते हैं। श्लोक 24 में यह स्पष्ट किया गया है कि मनुष्य को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसका निर्धारण करने में शास्त्र को प्रमाण मानना चाहिए।
लेखक ने इन दोनों श्लोकों के संदेश को केवल धार्मिक या आध्यात्मिक विषय के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उन्हें दैनिक जीवन के निर्णयों, व्यक्तिगत जिम्मेदारियों, परिवार, कार्यस्थल और सामाजिक व्यवहार से जोड़ने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, जीवन में स्वतंत्रता का अर्थ मनमाने ढंग से कार्य करना नहीं है। वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ है कि व्यक्ति अपने निर्णयों को विवेक, उचित मार्गदर्शन, कर्तव्य और जिम्मेदारी के आधार पर लेने का प्रयास करे।
इस पुस्तक में लेखक ने आत्मनिरीक्षण और विवेकपूर्ण निर्णय को भी विशेष महत्व दिया है। उनका मानना है कि व्यक्ति को समय-समय पर स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि उसके निर्णय केवल इच्छा, सुविधा या तत्काल लाभ से प्रभावित हैं, या वे उचित मार्गदर्शन, कर्तव्य और जिम्मेदारी के अनुरूप हैं। इस प्रकार आत्मनिरीक्षण व्यक्ति को अपने आचरण को समझने और आवश्यक सुधार करने में सहायता कर सकता है।
लेखक का उद्देश्य किसी व्यक्ति को उपदेश देना नहीं, बल्कि श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 के महत्वपूर्ण संदेश पर विचार करने के लिए पाठकों को प्रेरित करना है। उनका प्रयास है कि इन श्लोकों में दिए गए मार्गदर्शन को सरल और सहज भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि आधुनिक पाठक उसे अपने दैनिक जीवन की परिस्थितियों और निर्णयों से जोड़ सके।
यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए एक विनम्र प्रयास है, जो आत्मनिरीक्षण, विवेक, कर्तव्यबोध, अनुशासन, उचित आचरण और जिम्मेदार जीवन की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। लेखक की आशा है कि इस पुस्तक का अध्ययन पाठकों को अपने निर्णयों और आचरण पर विचार करने तथा मनमाने आचरण से बचकर शास्त्र, विवेक और कर्तव्य के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा देगा।
संजय कुमार श्रीवास्तव
लेखक / प्रस्तुतकर्ता

Book Details

Publisher: SANJAY KUMAR SRIVASTAVA
Number of Pages: 134
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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