You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution

Add a Review

“जैसी नीयत, वैसा भरोसा और सम्मान”

SANJAY KUMAR SRIVASTAVA
Type: Print Book
Genre: Self-Improvement, Philosophy
Language: Hindi
Price: ₹349 + shipping
Price: ₹349 + shipping
Dispatched in 5-7 business days.
Shipping Time Extra

Description

जैसी नीयत, वैसा भरोसा और सम्मान
अपने विचारों, व्यवहार और संबंधों को समझने की एक प्रेरणादायक यात्रा

क्या किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा और शब्दों से होती है, या उसकी नीयत और व्यवहार से?

हमारे जीवन में भरोसा, सम्मान और रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन सच्चा भरोसा केवल मीठी बातों से नहीं बनता और न ही वास्तविक सम्मान पद, धन या प्रतिष्ठा से प्राप्त होता है। इनका आधार है—हमारी नीयत, हमारे कर्म और दूसरों के प्रति हमारा व्यवहार।

“जैसी नीयत, वैसा भरोसा और सम्मान” एक ऐसी पुस्तक है जो पाठकों को अपने विचारों, व्यवहार और जीवन मूल्यों पर आत्मचिंतन करने के लिए प्रेरित करती है। यह समझने का अवसर देती है कि हमारे इरादे हमारे निर्णयों को कैसे प्रभावित करते हैं और हमारा आचरण दूसरों के मन में हमारे प्रति विश्वास और सम्मान की भावना कैसे उत्पन्न करता है।

इस पुस्तक के माध्यम से पाठक समझ सकते हैं कि सच्चे सम्मान और दिखावे में क्या अंतर है, रिश्तों में विश्वास क्यों आवश्यक है और मानवीय संबंधों को मजबूत बनाने में ईमानदारी, संवेदनशीलता, विनम्रता तथा जिम्मेदारी की क्या भूमिका होती है।

इस पुस्तक से आपको क्या सीखने को मिलेगा?
नीयत का महत्व: हमारे विचारों और इरादों का हमारे कर्मों तथा व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है।
भरोसे की वास्तविक पहचान: विश्वास कैसे बनता है और उसे बनाए रखने के लिए किन मूल्यों की आवश्यकता होती है।
सच्चे सम्मान का अर्थ: पद, धन और प्रतिष्ठा से परे व्यक्ति के वास्तविक सम्मान को समझना।
दिखावे और वास्तविकता में अंतर: बाहरी छवि और आंतरिक व्यक्तित्व के बीच के अंतर को पहचानना।
मानवीय संबंधों की मजबूती: ईमानदारी, सहानुभूति और जिम्मेदार व्यवहार से रिश्तों को बेहतर बनाना।
आत्मचिंतन और व्यक्तित्व विकास: अपने व्यवहार का मूल्यांकन करके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा प्राप्त करना।
यह पुस्तक किनके लिए उपयोगी है?

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अपने व्यक्तित्व को बेहतर बनाना चाहते हैं, रिश्तों में विश्वास और सम्मान का महत्व समझना चाहते हैं तथा जीवन में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देना चाहते हैं।

विद्यार्थियों, युवाओं, परिवारों, कार्यस्थल पर जिम्मेदारियाँ निभाने वाले व्यक्तियों और जीवन के अनुभवों से सीखने के इच्छुक पाठकों को इसमें आत्मचिंतन के उपयोगी अवसर मिल सकते हैं।

एक विचार, जो जीवन की दिशा बदल सकता है

जीवन में हर व्यक्ति चाहता है कि दूसरे उस पर भरोसा करें, उसका सम्मान करें और उसके साथ ईमानदार संबंध बनाए रखें। लेकिन इन अपेक्षाओं की शुरुआत दूसरों से नहीं, स्वयं से होती है।

जब हमारी नीयत साफ होती है, हमारे कर्म ईमानदार होते हैं और हमारा व्यवहार दूसरों के प्रति संवेदनशील होता है, तब विश्वास और सम्मान के लिए एक मजबूत आधार तैयार होता है।

याद रखिए—सच्चा सम्मान माँगने से नहीं, अपने आचरण से अर्जित किया जाता है; और सच्चा भरोसा शब्दों से नहीं, कर्मों से स्थापित होता है।

आइए, अपने विचारों और व्यवहार को समझने तथा जीवन में भरोसे, सम्मान और मानवीय मूल्यों को अधिक महत्व देने की इस यात्रा का हिस्सा बनें।

“जैसी नीयत, वैसा भरोसा और सम्मान” — स्वयं को समझने, संबंधों को सँवारने और बेहतर इंसान बनने की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास।

About the Author

लेखक परिचय — संजय कुमार श्रीवास्तव

संजय कुमार श्रीवास्तव Power Grid Corporation of India Ltd. के सेवानिवृत्त उप महाप्रबंधक (Deputy General Manager) हैं। अपने व्यावसायिक जीवन में उन्होंने अनुशासन, जिम्मेदारी, कार्य के प्रति समर्पण और नैतिक मूल्यों के महत्व को करीब से समझा है।

जीवन के अनुभवों और मानवीय संबंधों के प्रति अपनी समझ के आधार पर उनकी रुचि इस बात को समझने में है कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा या बाहरी व्यक्तित्व से नहीं, बल्कि उसकी नीयत, कर्मों और व्यवहार से बनती है।

उनका मानना है कि जीवन में सच्चा भरोसा ईमानदारी से, सम्मान अच्छे आचरण से और रिश्तों की मजबूती आपसी संवेदनशीलता तथा जिम्मेदारी से विकसित होती है।

उनकी पुस्तक “जैसी नीयत, वैसा भरोसा और सम्मान” पाठकों को आत्मचिंतन करने, अपने व्यवहार को समझने और जीवन में मानवीय मूल्यों को महत्व देने के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास है।

लेखन के माध्यम से उनका उद्देश्य ऐसे विचारों को पाठकों तक पहुँचाना है, जो व्यक्ति को स्वयं को बेहतर समझने, संबंधों में विश्वास बनाए रखने और जीवन में ईमानदारी, विनम्रता तथा सम्मान को अपनाने के लिए प्रेरित करें।

उनका विश्वास है कि सकारात्मक विचार तभी सार्थक बनते हैं, जब वे हमारे व्यवहार और कर्मों में दिखाई देते हैं।

Book Details

Publisher: SANJAY KUMAR SRIVASTAVA
Number of Pages: 282
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

“जैसी नीयत, वैसा भरोसा और सम्मान”

“जैसी नीयत, वैसा भरोसा और सम्मान”

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book “जैसी नीयत, वैसा भरोसा और सम्मान”.

Other Books in Self-Improvement, Philosophy

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.