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पुस्तक परिचय
क्या हर प्रेम कहानी का अंत साथ होना ही होता है?
कुछ रिश्ते समय के साथ पूरे नहीं होते, लेकिन यादों में हमेशा जीवित रहते हैं।
"यादों के उस पार" ऋषभ और सुरभि की ऐसी ही भावनात्मक यात्रा है, जहाँ पहली मुलाक़ात, अनकही बातें, बढ़ती नज़दीकियाँ, दूरियाँ और अधूरा प्रेम जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।
यह उपन्यास प्रेम को केवल पाने की कहानी नहीं, बल्कि उसे समझने, स्वीकार करने और उसकी स्मृतियों के साथ आगे बढ़ने की कहानी है। इसमें हर वह एहसास है, जिससे शायद हर किसी का दिल कभी न कभी गुज़रा होगा—इंतज़ार, उम्मीद, ख़ामोशी, बिछड़ना और फिर भी किसी के लिए मन में सम्मान बनाए रखना।
यह पुस्तक वास्तविक जीवन की कुछ भावनाओं से प्रेरित एक काल्पनिक उपन्यास है। यदि पढ़ते समय आपको किसी अपने की याद आए, किसी अधूरे रिश्ते की कसक महसूस हो या किसी पुराने संदेश पर ठहर जाने का मन करे, तो समझिए कि यह कहानी अपने उद्देश्य तक पहुँच गई है।
क्योंकि कुछ लोग हमारी ज़िंदगी से चले जाते हैं...
लेकिन हमारी यादों से कभी नहीं जाते।
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