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खुद से खुद तक : जज़्बात, खामोशियाँ और सच्चाई
यह किताब सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक एहसास है—उन अनकहे जज़्बातों का, जिन्हें हम अक्सर अपने भीतर दबाकर जीते रहते हैं।
“खुद से खुद तक” एक ऐसा सफ़र है, जहाँ इंसान बाहरी दुनिया से हटकर अपने ही दिल की आवाज़ सुनना शुरू करता है। इस किताब की हर कविता, हर पंक्ति, टूटन से उठने, दर्द को समझने और खुद को फिर से अपनाने की कहानी कहती है।
कभी यह आपको आपकी खामोशियों से मिलाएगी,
कभी आपके आँसुओं को शब्द देगी,
और कभी आपको यह एहसास कराएगी कि—
आप जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज्यादा मजबूत हैं।
यह किताब उन सभी के लिए है—
जो कभी टूटे हैं,
जो अब भी संभल रहे हैं,
और जो खुद को फिर से पाने की तलाश में हैं।
अगर आपने कभी खुद से दूर होकर जीया है,
तो यह किताब आपको धीरे-धीरे वापस “आप” तक ले जाएगी।
क्यों पढ़ें यह किताब?
* दिल को छू लेने वाली सरल और सच्ची कविताएँ
* आत्म-चिंतन और healing का अनुभव
* हर उम्र के पाठकों के लिए relatable भावनाएँ
यह सिर्फ एक किताब नहीं,
बल्कि खुद से मिलने का एक सुकून भरा रास्ता है।
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