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किताब के बारे में:
क्या किसी को सच में भूल जाना मुमकिन है? या फिर किसी को अपनी ज़िंदगी से आज़ाद कर देना ही मोहब्बत का सबसे मुकम्मल रूप होता है?
'जाने दिया उसे' सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि दिल के उन अनकहे सवालों और जज़्बातों का आईना है, जिन्हें हम अक्सर भीड़ में छुपाए फिरते हैं। जब स्कूल के उसी भीगे हुए कॉरिडोर के आखिरी मोड़ पर रिश्ते ठहर जाते हैं, और चलने का वह भ्रम—जो हम 'मूव ऑन' के नाम पर बनाए रखते हैं—अचानक टूट जाता है, तब सीने में क्या बचता है?
सोहम मेश्राम ने इस किताब में अपनी सीधी-सादी, लेकिन रूह को छू लेने वाली शैली के ज़रिए दोस्ती, अधूरी ख्वाहिशों और खुद को समेटने की जद्दोजहद को उकेरा है। कहानी के साथ पिरोई गई संवेदनशील नज़्में और अश'आर हर उस इंसान के लिए हैं जिसने कभी किसी को टूटकर चाहा हो, और फिर भारी मन से... हमेशा के लिए जाने दिया हो।
यह किताब आपको अपने ही किसी पुराने मोड़, किसी खोई हुई शाम के करीब ले जाएगी और यह तसल्ली देगी कि किसी को खोने का अकेलापन सिर्फ आपका नहीं है।
इस किताब में आपको मिलेगा:
एक ठहराव भरी, भावुक और यथार्थवादी कहानी (Coming-of-age novella)
अलगाव, विदाई और दर्द पर गहरी शायरी और नज़्में
सहज और दिल को छू जाने वाली हिंदी भाषा
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