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हर कदम सोचकर एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसे बचपन से सिखाया गया कि कहाँ जाना है, कैसे बोलना है, क्या पहनना है और दुनिया की नज़रों से बचकर कैसे रहना है।
अनन्या की कहानी सिर्फ एक लड़की की कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत लड़कियों की आवाज़ है जो हर कदम पर अपनी आज़ादी और दूसरों की उम्मीदों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं।
यह किताब उन सवालों को सामने लाती है जिन पर अक्सर घरों में चुप्पी छा जाती है—क्या सुरक्षा के नाम पर पाबंदियाँ ज़रूरी हैं? क्या अपनी बात रखना बगावत है? और क्या एक लड़की को अपनी ज़िंदगी जीने के लिए हर बार सफाई देनी चाहिए?
हर कदम सोचकर एक ऐसी सामाजिक कहानी है जो सोचने, समझने और बदलाव की शुरुआत करने की प्रेरणा देती है।
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