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**एक दुनिया में कितनी दुनियाएँ** केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर बसती अनगिनत दुनियाओं की यात्रा है।
इन कविताओं में सपने हैं, डर हैं, उम्मीदें हैं, स्मृतियाँ हैं, रिश्तों की गर्माहट है, जिम्मेदारियों का भार है और जीवन के उन छोटे-छोटे क्षणों की गूँज है जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, पर शब्द नहीं दे पाते।
यह पुस्तक उन लोगों के लिए है जो जीवन को केवल जीते नहीं, बल्कि उसे भीतर तक महसूस करते हैं। यदि कभी किसी साधारण-सी घटना ने आपको देर तक सोचने पर मजबूर किया है, यदि आपने अपने भीतर कई रूपों को एक साथ जीया है, तो यह पुस्तक शायद आपकी ही कहानी कहती है।
हर पाठक अपने अनुभवों के साथ इन कविताओं में एक नई दुनिया खोजेगा, क्योंकि सचमुच—एक दुनिया में कितनी दुनियाएँ होती हैं।
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