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क्या आप भी हर महीने सैलरी का इंतज़ार करते हैं और महीना खत्म होने से पहले ही जेब खाली हो जाती है? हम दिन-रात मेहनत तो करते हैं, लेकिन बैंक बैलेंस वहीं का वहीं रहता है। सच तो यह है कि समस्या आपकी कमाई नहीं, बल्कि वो बातें हैं जो हमें स्कूल में कभी सिखाई ही नहीं गईं। सुनील बुटोलिया की यह किताब आपको सिखाती है कि अमीर बनना कोई जादुई खेल नहीं, बल्कि सही आदतों और 'धनवान मानसिकता' का नतीजा है। यह किताब उन आर्थिक बेड़ियों को तोड़ने का काम करती है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमें मध्यमवर्गीय सोच में जकड़े हुए हैं।
इस किताब में रातों-रात अमीर बनने के खोखले दावे नहीं, बल्कि निवेश और बचत के वो व्यावहारिक नियम हैं जिन्हें अपनाकर एक साधारण नौकरीपेशा व्यक्ति भी करोड़ों की संपत्ति बना सकता है। यहाँ आप सीखेंगे कि पैसा आपका मालिक नहीं, बल्कि वफादार सेवक कैसे बन सकता है। चाहे आप विद्यार्थी हों या नौकरीपेशा, यह किताब आपको 'कंपाउंडिंग के जादू' से लेकर 'आर्थिक स्वतंत्रता' तक का स्पष्ट रास्ता दिखाएगी। यदि आप अपनी और अपने परिवार की वित्तीय कहानी बदलना चाहते हैं, तो यह आपकी पहली और सबसे ज़रूरी सीढ़ी है।
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