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मूल्य संवर्धन से समृद्धि की ओर

ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा दर्शिका
Supriya
Type: Print Book
Genre: Science & Technology
Language: Hindi
Price: ₹179 + shipping
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Description

कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन की भूमिका किसानों की आय वृद्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण है। फसल कटाई के पश्चात अधिक उत्पादन के कारण बाजार में कृषि उत्पादों की अधिकता हो जाती है, जिससे कीमतें तेजी से गिर जाती हैं। ऐसी स्थिति में किसान को अपना उत्पाद अत्यंत कम मूल्य पर बेचना पड़ता है। जो फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे से बाहर हैं, उनमें तो किसान को अपनी लागत भी वापस नहीं मिल पाती। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए विपणन योग्य अधिशेष और विपणित अधिशेष में व्यावहारिक रूप से कोई अंतर नहीं रह जाता, क्योंकि उनकी पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद बिक्री हेतु बहुत कम उत्पाद शेष बचता है।
यह पुस्तक इस गंभीर समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि विभिन्न कृषि उत्पादों को प्रसंस्कृत उत्पादों में किस प्रकार परिवर्तित किया जाए, जिससे उनकी भंडारण अवधि बढ़े और निर्यात मूल्य में भी वृद्धि हो। इसके साथ ही, इन उत्पादों के विपणन की प्रभावी रणनीतियाँ भी सुझाई गई हैं। यंत्रों एवं उपकरणों की साझा खरीद के माध्यम से उत्पादन लागत कम करने के उपाय भी बताए गए हैं। स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) एवं किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) से जुड़कर किसान किस प्रकार सामूहिक शक्ति का लाभ उठा सकते हैं, यह भी इस पुस्तक में सरल एवं बोधगम्य भाषा में समझाया गया है।

About the Author

डॉ. सुप्रिया वर्तमान में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या (उ.प्र.) के कृषि अर्थशास्त्र विभाग में सह प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से कृषि अर्थशास्त्र में एम.एससी. एवं पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। इसके अतिरिक्त, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल से अर्थशास्त्र में एम.ए. तथा सिम्बायोसिस सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग, पुणे से मानव संसाधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। इन्होंने आईसीएआर-एआरएस नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की है।
15 वर्षों से अधिक के शिक्षण, शोध एवं कृषि विस्तार अनुभव के साथ इन्होंने आईएआरआई, नई दिल्ली तथा गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में कार्य किया है। कृषि अर्थशास्त्र, कृषि व्यवसाय प्रबंधन एवं कृषि सांख्यिकी इनके विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की नास-रेटेड तथा पियर रिव्यू पत्रिकाओं में इनके 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। ये फार्म मैनेजमेंट एंड इट्स प्रैक्टिकल यूटिलिटी, एग्रीबिजनेस फंडामेंटल्स ऑफ डिसीजन मेकिंग तथा मैनुअल कम वर्कबुक ऑन एग्रीकल्चरल फाइनेंस एंड कोऑपरेशन सहित अनेक पुस्तकों की लेखिका हैं तथा हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लोकप्रिय लेख भी लिखे हैं।
इन्हें युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, उत्कृष्ट शोध पुरस्कार एवं उत्कृष्ट शिक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2023 में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार तथा वर्ष 2025 में माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के करकमलों द्वारा उपकार राज्य पुरस्कार के अंतर्गत युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से विभूषित किया गया। शिक्षण के प्रति समर्पण एवं विपुल शोध अवदान के माध्यम से डॉ. सुप्रिया ने कृषि अर्थशास्त्र के क्षेत्र में एक गतिशील शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं मार्गदर्शक के रूप में अपनी सुदृढ़ पहचान स्थापित की है।

Book Details

ISBN: 9789358919660
Publisher: Supriya Publications
Number of Pages: 95
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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