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कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा के लिए नहीं आते, फिर भी उनके आने से हमारी ज़िंदगी पहले जैसी नहीं रहती।
वैष्णवी — एक याद उन्हीं एहसासों की किताब है जिन्हें शायद कभी ठीक से कहा नहीं जा सका। इसमें प्रेम है, इंतज़ार है, कुछ अधूरी बातें हैं और उन छोटी-छोटी यादों की दुनिया है, जो समय बीतने के बाद भी कहीं भीतर रह जाती हैं।
यह किसी प्रेम कहानी को पूरा करने की कोशिश नहीं है। यह उस सफ़र को शब्द देने की कोशिश है जिसमें एक इंसान किसी दूसरे को चाहना सीखता है, अपनी भावनाओं को समझता है और धीरे-धीरे यह जानने लगता है कि हर चाहत का पूरा होना ज़रूरी नहीं होता।
इस किताब के पन्नों में जो कुछ है, वह कभी कविता बन गया, कभी शिकायत, कभी प्रार्थना और कभी सिर्फ़ एक याद।
शायद हर पाठक को इसमें अपनी कहानी न मिले। लेकिन अगर कभी किसी की याद ने आपको बिना किसी वजह मुस्कुराने पर मजबूर किया हो, या किसी अधूरी बात को बरसों अपने भीतर रखा हो, तो हो सकता है इस किताब का कोई पन्ना आपको अपना-सा लगे।
क्योंकि कुछ कहानियाँ ख़त्म हो जाती हैं, मगर उनसे मिले एहसास इतनी आसानी से नहीं जाते।
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