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इन गजलों में मोहब्बत की वो खुशबू है जो कभी मुकम्मल नहीं हुई, और वो दर्द है जिसे मैंने हंसकर छुपा रखा है। ये शब्द सिर्फ मेरी कलम से नहीं निकले, बल्कि ये मेरी रूह की वो आवाजें हैं जो अब तक खामोश थीं। अगर मेरे ये 'अधूरे लफ्ज' आपके दिल के किसी कोने को छू पाए, तो समझियेगा कि मेरा यह सफर मुकम्मल हो गया।
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