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क्या हम सच में अपनी जिंदगी जी रहे हैं... या किसी और के सपनों का किरदार निभा रहे हैं?
Middle Class Matrix एक आईना है- जो मध्यम वर्ग की उस दुनिया को दिखाता है,
जहाँ जन्म से ही जिम्मेदारियाँ तय हो जाती हैं, सपनों की पोस्टिंग बाँट दी जाती है, और सफलता की परिभाषा केवल नौकरी, शादी, घर, गाड़ी और बच्चों तक सीमित रह जाती है।
यह किताब सिर्फ आर्थिक संघर्ष की कहानी नहीं है; यह मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक दबावों की परतें खोलती है यह बताती है कि कैसे "वो चार लोग", समाज, सरकार, EMI, तुलना और अधूरे ख्वाब मिलकर एक ऐसा मैट्रिक्स बनाते हैं, जिसमें हम सब फैसे हुए हैं- और फिर भी उसे ही अपनी नियति मान लेते हैं।
अगर आप अपना गांव शहर छोड़, बड़े शहरों की बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स में रह कर अपनी जिंदगी रोजमर्रा के जद्दोजहद में बिता रहें हैं तो यह पुस्तक आपको हँसाएगी, चुभेगी, सोचने पर मजबूर करेगी, और शायद पहली बार आप खुद से पूछेंगे:
क्या मैं वही जीवन जी रहा हूँ, जो मैं सच में जीना चाहता था? अगर आप कभी EMI भरते हुए धके हैं, बच्चों के भविष्य को लेकर जागे हैं, या बालकनी में बैठकर सोचा है कि "क्या इसी के लिए इतनी दौड़ थी?" तो यह किताब आपकी ही कहानी है।
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