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“गाँव से थोड़ा दूर” एक भावनात्मक और प्रेरणादायक जीवन-कथा है, जो गाँव की मिट्टी, परिवार के रिश्तों, दोस्ती, पढ़ाई, संघर्ष और अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश के इर्द-गिर्द घूमती है।
यह कहानी एक ऐसे सफर को दिखाती है जिसमें लेखक अपने गाँव से निकलकर जयपुर की जिंदगी देखता है, लगभग 15 साल शहर में बिताता है और फिर भी अपनी जड़ों और गाँव से जुड़ा रहता है। कहानी में संयुक्त परिवार का साथ, भाई-बहनों का रिश्ता, दोस्तों की दोस्ती, माता-पिता और परिवार की उम्मीदें तथा छोटे दादाजी की याद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
किताब यह भी बताती है कि सफलता केवल नौकरी, पैसा या ऊँचा मुकाम हासिल करने का नाम नहीं है। असली सफलता अपने परिवार को खुश रखना, अपने पैरों पर खड़ा होना, अच्छे इंसान बने रहना और अपनी मिट्टी व अपनी जड़ों को कभी न भूलना है।
“गाँव से थोड़ा दूर” उन यादों और अनुभवों की कहानी है जो इंसान को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, लेकिन अपनी पहचान और अपनों से जुड़े रहना भी सिखाते हैं।
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