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“बालमन को छूती एक तिलिस्मी कथा, जो बच्चों की कल्पना को नए पंख देती है।” — सुरभि सिंघल, बेस्टसेलर लेखिका
“कुछ कहानियाँ समाप्त होने के बाद भुला दी जाती हैं, लेकिन इसका रहस्य पुस्तक बंद करने के बाद भी साथ रहता है।”— रूपेश कुमार, लेखक एवं एंकर
“सौंदर्य के पीछे छिपे अँधेरे की कहानी—यही इस उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता है।” — चेतन चौहान, लेखक एवं सामाजिक चिंतक
“कल्पना और रोमांच की अद्भुत यात्रा, जो पाठक को आरंभ से ही अपने मोहपाश में बाँध लेती है।”— संदीप शर्मा, बेस्टसेलर लेखक एवं बैंकर
एक शिकार यात्रा पर निकले शेरगढ़ के न्यायप्रिय महाराज सुयश देव अनजाने में पहुँच जाते हैं सुंदरवन—एक ऐसा रहस्यमयी वन, जहाँ फूल आँखों को भ्रमित करते हैं, सुगंध स्मृतियों को बाँध लेती है और रास्ते पल-पल अपना रूप बदलते हैं।
इस मायावी संसार में उनकी भेंट होती है अद्भुत सुंदरी भद्रिका से, जिसका दावा है कि केवल महाराज ही सुंदरवन को वर्षों पुराने तिलिस्म से मुक्त कर सकते हैं। लेकिन उसके भोले चेहरे और मधुर शब्दों के पीछे छिपा है एक ऐसा रहस्य, जो न केवल सुयश देव के जीवन, बल्कि पूरे शेरगढ़ के भविष्य को अंधकार में धकेल सकता है।
उधर राजमहल में महारानी गरिमा का विश्वास, राजमाता की आशंकाएँ और एक के बाद एक घटती अशुभ घटनाएँ आने वाले संकट की चेतावनी दे रही हैं।
क्या महाराज सुंदरवन के मोह-जाल से बाहर निकल पाएँगे?
क्या गरिमा का प्रेम उस तिलिस्म को तोड़ सकेगा?
या शेरगढ़ पर फिर लौटेगी वह पुरानी छाया, जिसका भय समय भी नहीं मिटा पाया?
प्रेम, रहस्य, छल और अलौकिक शक्तियों से बुनी एक रोमांचक गाथा— सुंदरवन का तिलिस्म।
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