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काशी का लड़का
काशी की गलियों में पला एक साधारण लड़का, जिसके सपने उसकी औक़ात से कहीं बड़े थे।
अभिमन्यु की ज़िंदगी में सब कुछ धीरे-धीरे बदलता है—एक लड़की के आने से, एक दोस्त के साथ से और उन सपनों से जिन्हें पूरा करने के लिए उसे बार-बार खुद को साबित करना पड़ता है।
नंदिनी सिर्फ़ उसकी मोहब्बत नहीं, बल्कि अपनी आज़ादी के लिए लड़ने वाली एक ऐसी लड़की है जो समाज की बनाई सीमाओं को स्वीकार करने से इनकार करती है। वहीं राघव की दोस्ती इस कहानी को वो अपनापन देती है, जो हर मुश्किल मोड़ पर अभिमन्यु के साथ खड़ा रहता है।
लंका की गलियों, कचौड़ी गली के छोटे-से घर, BHU की आख़िरी बेंच और गंगा के घाटों के बीच यह कहानी आगे बढ़ती है—जहाँ पहला प्यार भी है, दोस्ती भी है, संघर्ष भी है और अपने सपनों को सच करने की ज़िद भी।
काशी का लड़का सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं है।
यह उस उम्र की कहानी है जब दोस्ती सबसे सच्ची लगती है, मोहब्बत पहली बार दिल को छूती है और इंसान पहली बार समझता है कि उसे अपनी ज़िंदगी किस तरह जीनी है।
क्योंकि कुछ कहानियाँ किताब के आख़िरी पन्ने के साथ खत्म नहीं होतीं…
वे बनारस की गलियों की तरह दिल में हमेशा बसी रहती हैं।
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