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कुछ मुलाकातें जिंदगी बदल देती हैं और कुछ बिछड़ने के बाद भी कभी खत्म नहीं होतीं।
प्रखर और सिद्धि की कहानी भी एक ऐसी ही मोहब्बत की कहानी है, जहाँ दो दिल एक-दूसरे में अपना पूरा संसार खोज लेते हैं। छोटे-छोटे पल, अनकही बातें और साथ जीने के खूबसूरत सपने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन जाते हैं।
लेकिन जब मोहब्बत अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही होती है, तभी सिद्धि अचानक प्रखर की जिंदगी से गायब हो जाती है। पीछे रह जाते हैं कुछ अधूरे खत, अनगिनत सवाल और एक ऐसा सच, जो उनकी पूरी कहानी बदल सकता है।
क्या प्रखर कभी सिद्धि को ढूंढ़ पाएगा? और क्या हर मोहब्बत का मिलना जरूरी होता है?
‘काश तुम ही मिले होते’ सिर्फ दो लोगों की कहानी नहीं, बल्कि उस मोहब्बत का एहसास है, जो अधूरी रहकर भी कभी खत्म नहीं होती।
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