You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
घर छूट गया" एक ऐसे युवा की कहानी है, जो गुस्से, बेरोजगारी और अपनों की उम्मीदों के बोझ से तंग आकर अपना गाँव छोड़ देता है। सपनों की तलाश में शहर की भीड़, संघर्ष, नई मुश्किलें और एक अनजाना रिश्ता उसे जिंदगी का असली मतलब सिखाता है।
क्या गाँव छोड़कर जाने वाला हरी कभी अपने सपनों और अपनों के बीच की दूरी को मिटा पाएगा?
गाँव, शहर, और खुद को तलाशने के इस सफर की एक दिल को छू लेने वाली कहानी।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book घर छूट गया. भाग -1.