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तेरे बाद
कुछ मोहब्बतें मुकम्मल नहीं होतीं, लेकिन हमेशा के लिए मुकद्दर हो जाती हैं।
"तेरे बाद" सिर्फ़ बिछड़ने की कहानी नहीं है, बल्कि उस सफ़र की दास्तान है जो किसी अपने के चले जाने के बाद शुरू होता है।
यह कविता-संग्रह उन यादों, सवालों, तन्हाइयों, टूटनों और बदलावों को शब्द देता है जो अक्सर दिल में रह जाते हैं, लेकिन ज़ुबान तक नहीं पहुँच पाते। हर कविता एक ऐसे इंसान की कहानी कहती है जो मोहब्बत खो देने के बाद भी उसके एहसासों के साथ जीना सीख रहा है।
इस पुस्तक में प्रेम है, इंतज़ार है, शिकायतें हैं, अधूरे ख़्वाब हैं, और सबसे बढ़कर ख़ुद को फिर से खोज लेने की कोशिश है। यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने कभी किसी को दिल से चाहा हो, किसी के जाने के बाद खालीपन महसूस किया हो, या अपनी यादों के सहारे आगे बढ़ना सीखा हो।
शायद इन पन्नों में आपको अपनी कोई याद, कोई अधूरा सवाल, या अपने दिल का कोई अनकहा हिस्सा मिल जाए।
क्योंकि कुछ कहानियाँ ख़त्म नहीं होतीं, वे बस "तेरे बाद" शुरू होती हैं।
— योगेश "साकित"
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