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यह पुस्तक रामायण का पुनर्कथन नहीं है। यह उसके उन क्षणों को शब्दों में अनुभव करने का एक विनम्र प्रयास है, जहाँ कथा से अधिक भाव बोलते हैं। श्रीराम की यात्रा के चयनित प्रसंगों को मौलिक काव्य, चिंतन और दृश्यात्मक संवेदना के माध्यम से आज के पाठक के निकट लाने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य किसी परंपरा का स्थान लेना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे प्रकाश को एक सरल, साहित्यिक और भावपूर्ण रूप में सामने रखना है। यदि इन पृष्ठों में कोई एक पंक्ति भी पाठक को ठहरने, सोचने या अपने भीतर झाँकने के लिए प्रेरित करे, तो यह यात्रा सार्थक होगी।
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