जब बारिश ने घर चुना
जहाँ रास्ते मिलते हैं
खिड़की के उस पार
आँगन में ठहरी सर्दी
दो शहरों की धूप
दूसरी सुबह
टूटे आकाश के रास्ते
विराम का रहस्य
जब नदियाँ ऊपर उठीं
अंतिम धारा
अपरिमेय
ज्वार
धूप की दूसरी पाली
सेब के बाद का मौसम
तुम्हारी आवाज़ यहाँ थी
रात का चौथा टिकट
पीतल की दोपहर
उल्टी तरफ का नीला
पानी की पहली सीढ़ी
कमरा अभी खाली है
दीवार के उस पार सुबह
खेल खत्म होने के बाद
इस तस्वीर में मत आना
उस शाम कोई नहीं हारा