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पुस्तक की परिचयः इस पुस्तक का प्रथम अंक रामचरितमानस में अन्तर्निहित मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक तत्वों का गहन एवं शोधपरक अध्ययन प्रस्तुत करता है। गोस्वामी जी ने मानव मन, धारणा, विचार, भावना, संवेग एवं व्यवहार के सम्बन्धों; उनके मनोवैज्ञानिक प्रभाव तथा मानसिक समस्याओ के समाधान को अपने अद्भुत एवं रोचक छन्दों के माध्यम से व्यक्त किया है। इसी तरह तत्व मीमांसा, ज्ञान मीमांसा एवं समय की अवधारणा जैसे गूढ़, जटिल एवं नीरस दार्शनिक तत्वो को उन्होंने अत्यन्त सरल, रोचक एवं व्यवहारिक बना कर काव्य के माध्यम से जनसाधारण के लिए प्रस्तुत किया है। उनका समन्वयवादी दर्शन मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास यात्रा का अधारभूत स्तम्भ है। मानस के परिप्रेक्ष्य में सौन्दर्यता एवं मानवीय मूल्यों के आयाम का अध्ययन मानव विकास के आवश्यक तत्व हैं।
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