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बिखरे हुए जज़्बात कौशल कबीर ‘सोनू’ द्वारा रचित एक भावपूर्ण जनिका-संग्रह है। इस संग्रह में लगभग 650 जनिकाएँ शामिल हैं, जिनके माध्यम से मन के विविध भावों, प्रेम, विरह, दर्द, संघर्ष, रिश्तों, तन्हाई और जीवन के अनुभवों को संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।
जनिका एक नवीन लघु काव्य-विधा है, जिसमें केवल तीन पंक्तियों के माध्यम से भावों को विशेष ढंग से व्यक्त किया जाता है। पहली पंक्ति में एक शब्द, दूसरी में दो शब्द और तीसरी पंक्ति में तीन शब्दों के माध्यम से भाव को क्रमशः विस्तार दिया जाता है।
इस पुस्तक में इश्क़, जज़्बात, दर्द, विरह, यादें, तन्हाई, उम्मीद और रिश्तों से जुड़े अनेक संवेदनशील भाव दिखाई देते हैं। लेखक ने अपने अनुभवों और मन की अनुभूतियों को सरल एवं प्रभावशाली शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।
ग़ज़ल के प्रति लेखक की विशेष रुचि का प्रभाव भी इस संग्रह की भाषा और भावभूमि में दिखाई देता है। कम शब्दों में गहरे भाव व्यक्त करना इस संग्रह की प्रमुख विशेषताओं में से एक है।
“बिखरे हुए जज़्बात” उन पाठकों के लिए एक भावनात्मक और संवेदनशील काव्य-संग्रह है, जो हिंदी कविता, प्रेम-विरह और लघु काव्य-विधाओं को पढ़ना पसंद करते हैं।
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