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क्या आप वही जीवन जी रहे हैं जो आप वाकई जीना चाहते थे? या आप उन अनगिनत झूठों के साथ जी रहे हैं जो आपने खुद से और दूसरों से बोले हैं?
हम सब जानते हैं कि कहीं न कहीं हम अपनी पूरी क्षमता से नहीं जी रहे। हम कम्फर्ट ज़ोन में फँसे रहते हैं, बहाने बनाते हैं, और अपनी उस 'बेस्ट वर्शन' तक पहुँचने से डरते हैं, जिसे हम वाकई हासिल कर सकते हैं। यह किताब उसी 'अदृश्य युद्ध' (Invisible War) के बारे में है, जो हम हर दिन खुद से लड़ते हैं।
सच और झूठ के पार' कोई मोटिवेशनल स्पीच नहीं है, बल्कि यह एक प्रैक्टिकल टूलकिट है। कुनाल परिहार द्वारा लिखी गई यह पुस्तक आपको सिखाएगी कि कैसे:
.आत्म-धोखे (Self-Deception) की जेल से बाहर निकलें: उन झूठों को पहचानें जो आपकी तरक्की को रोक रहे हैं।
.चरित्र की नींव रखें: ईमानदारी और इंटीग्रिटी को सिर्फ शब्द नहीं, अपनी रोज़मर्रा की लाइफ का हिस्सा बनाएं।
.सच की शक्ति को अनलॉक करें: कैसे सच बोलना आपको एंग्जायटी, पछतावे और डर से आज़ाद कर सकता है।
.एक्शन लें: हर अध्याय में मौजूद मनोवैज्ञानिक इनसाइट्स, रियल-लाइफ एग्ज़ाम्पल्स, रिफ्लेक्शन क्वेश्चन्स और '90-दिन का ट्रांसफॉर्मेशन प्लान' जो आपको बदलाव की ओर ले जाएगा।
क्या आप आईने में देखने और सच से दोस्ती करने के लिए तैयार हैं? यह यात्रा आज से शुरू होती है। अपनी कॉपी आज ही ऑर्डर करें और अपने सबसे अच्छे संस्करण (Best Version) की ओर पहला कदम उठाएं।
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