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वक्तृत्व कौशल और व्यक्तित्व निर्माण भारतीय ज्ञान परंपरा,व्यक्तित्व विकास एवं रोजगार के परिप्रेक्ष्य में Class: B.A./B.Sc./B.Com 1st Year

भारतीय ज्ञान परंपरा,व्यक्तित्व विकास एवं रोजगार के परिप्रेक्ष्य में Class: B.A./B.Sc./B.Com 1st Year
डॉ. एन. पी. प्रजापति
Type: Print Book
Genre: Education & Language
Language: Hindi
Price: ₹286 + shipping
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Description

वक्तृत्व केवल मंच पर भाषण देने की कला नहीं है; यह अपने विचारों को स्पष्टता, आत्मविश्वास और प्रभाव के साथ अभिव्यक्त करने की क्षमता है। प्रभावी वक्तृत्व व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाता है, उसके व्यक्तित्व को निखारता है और शिक्षा, रोजगार तथा सामाजिक जीवन में सफलता के नए अवसर प्रदान करता है।

‘वक्तृत्व कौशल और व्यक्तित्व निर्माण’ पुस्तक भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाद-मूल्यों को आधुनिक संचार-कौशल और रोजगार की आवश्यकताओं से जोड़ती है। इसमें वक्तृत्व की अवधारणा, स्वरूप एवं महत्त्व के साथ गुरुकुल परंपरा, संवाद-कला, भाषण की तैयारी, प्रभावी प्रस्तुति, भाषा, स्वर, उच्चारण, शारीरिक भाषा और मंचीय आत्मविश्वास जैसे विषयों को सरल एवं क्रमबद्ध रूप में समझाया गया है।

पुस्तक में व्यक्तित्व निर्माण, आत्ममूल्यांकन, लक्ष्य-निर्धारण और आत्मविश्वास के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही प्रबोधन, शिक्षण, कथा-वाचन, विधि, समाज-सुधार, विपणन, राजनीति, परामर्श, उद्घोषणा, मंच-संचालन, मीडिया और डिजिटल माध्यमों में वक्तृत्व से जुड़ी रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं का भी परिचय दिया गया है।

श्रीकृष्ण, स्वामी विवेकानंद, महामना मदन मोहन मालवीय, अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसी प्रेरक विभूतियों की संवाद एवं वक्तृत्व-कला का विश्लेषण पुस्तक को विशेष उपयोगी बनाता है।

यह पुस्तक बी.ए., बी.एससी. एवं बी.कॉम. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के साथ उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी है, जो अपनी अभिव्यक्ति, संवाद-कौशल, मंचीय आत्मविश्वास और व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाना चाहते हैं।

About the Author

डॉ. एन. पी. प्रजापति उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (IEHE), भोपाल के हिन्दी विभाग में विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्राध्यापक हैं। हिन्दी भाषा और साहित्य के अध्यापन से जुड़े डॉ. प्रजापति की विशेष रुचि भारतीय ज्ञान परंपरा, हिन्दी साहित्य, व्यक्तित्व विकास, संचार-कौशल और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा में है।

वे अध्यापन को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की प्रक्रिया न मानकर विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति-कौशल और व्यक्तित्व के समग्र विकास का माध्यम मानते हैं। उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी, सरल और व्यावहारिक अध्ययन-सामग्री तैयार करना उनके शैक्षणिक कार्य का प्रमुख उद्देश्य है।

‘वक्तृत्व कौशल और व्यक्तित्व निर्माण’ में उन्होंने भारतीय संवाद-परंपरा को आधुनिक वक्तृत्व-कला, व्यक्तित्व-विकास तथा रोजगार की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया है। उनकी लेखन-शैली विषय की गंभीरता को बनाए रखते हुए सहज, स्पष्ट और विद्यार्थी-अनुकूल है।

Book Details

Number of Pages: 222
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

वक्तृत्व कौशल और व्यक्तित्व निर्माण भारतीय ज्ञान परंपरा,व्यक्तित्व विकास एवं रोजगार के परिप्रेक्ष्य में Class: B.A./B.Sc./B.Com 1st Year

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