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"लेखमाला: धर्म, विज्ञान, समाज और लोकतंत्र" लेखक दयानन्द सिवाच की एक विचारोत्तेजक कृति है, जिसमें धर्म, विज्ञान, भारतीय इतिहास, समाज, दर्शन, संविधान तथा समकालीन राजनीति जैसे विविध विषयों पर आधारित 90 से अधिक लेखों का संकलन प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक लगभग तीन दशकों के अध्ययन, चिंतन, सामाजिक सक्रियता तथा ज्ञान-विज्ञान आंदोलनों में लेखक की सहभागिता का परिणाम है। इस पुस्तक में भारतीय संविधान, स्वतंत्रता आंदोलन, भगत सिंह, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, धर्मनिरपेक्षता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, वैदिक साहित्य, दर्शन, सामाजिक न्याय, जाति व्यवस्था, सांप्रदायिकता तथा आधुनिक भारत के अनेक महत्वपूर्ण प्रश्नों पर तथ्यपरक एवं तर्कसंगत चर्चा की गई है। लेखक ने ऐतिहासिक स्रोतों, प्रतिष्ठित विद्वानों के विचारों तथा प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर जटिल विषयों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक किसी विचार को थोपने के बजाय पाठकों को प्रश्न पूछने, तथ्यों की जाँच करने तथा विवेकपूर्ण निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित करती है। विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा जागरूक नागरिकों के लिए यह एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है, जो भारतीय समाज, संस्कृति, लोकतंत्र और वैज्ञानिक चिंतन को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करता है।
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