Description
काव्यांजलि जीवन के विविध रंगों, मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, संघर्षों और आशाओं का काव्यात्मक संकलन है। इस संग्रह की कविताएँ पाठक को आत्ममंथन, अनुभूति और भावनात्मक जुड़ाव की एक अनूठी यात्रा पर ले जाती हैं।
पूर्णिमा गोंटिया और प्रभा गोंठिया की यह पहली साझा कृति जीवन के उन अनुभवों को शब्द देती है, जो कभी स्मृतियों में बसते हैं, कभी संघर्षों में उभरते हैं और कभी सपनों का रूप लेते हैं। सरल भाषा और संवेदनशील अभिव्यक्ति से सजी ये रचनाएँ पाठकों के हृदय को स्पर्श करने के साथ-साथ उन्हें विचार करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
"काव्यांजलि" - संवेदनाओं से सजी एक ऐसी काव्य-यात्रा, जिसमें हर पाठक स्वयं को कहीं न कहीं अवश्य पाएगा।
पूर्णिमा गोंटिया एक विज्ञान संचारक (Science Communicator), साइबर सुरक्षा जागरूकता की समर्थक (Cybersecurity Advocate) और बहुआयामी लेखिका हैं। उन्होंने अब तक 21 पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, इतिहास, व्यक्तित्व विकास, कविता और मानवीय मूल्यों जैसे विविध विषय शामिल हैं। वे भौतिकी में स्नातकोत्तर (M.Sc. Physics) हैं तथा Google Cyber Security Professional Certificate प्राप्त कर चुकी हैं। उनके लेखन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। साहित्य और ज्ञान को समाज के सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम मानते हुए वे डिजिटल सुरक्षा, शिक्षा, मानवाधिकार और रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं।
प्रभा गोंठिया हिंदी साहित्य की अध्येता, शिक्षिका और शोधार्थी हैं। वे रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से हिंदी साहित्य में शोधरत हैं, जहाँ उनके शोध का केंद्र प्रख्यात कथाकार स्वयं प्रकाश की गद्य-रचनाएँ हैं। साहित्य, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता रही है। एक शिक्षिका के रूप में वे लंबे समय से विद्यार्थियों के बौद्धिक और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी रही हैं। साथ ही, वे कई वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के अध्ययन और तैयारी में सक्रिय हैं। साहित्य के प्रति उनका अनुराग प्रारंभ से ही रहा है, जिसने उन्हें शोध, लेखन और सृजन की दिशा में निरंतर प्रेरित किया है।
"काव्यांजलि" पूर्णिमा गोंटिया और प्रभा गोंठिया की पहली साझा कृति है। यह काव्य-संग्रह जीवन, संघर्ष, आशा, रिश्तों, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। दोनों लेखिकाएँ मानती हैं कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज और मनुष्य के बीच संवेदनशील संवाद स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है।
Number of Pages: 69
Dimensions: A4
Interior Pages: Full Color
Binding:
Paperback (Perfect Binding)
Availability:
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