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"बेटियों का सच" केवल एक किताब नहीं, बल्कि हमारे समाज के उस चेहरे का आईना है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। इस किताब में बेटियों के जीवन के संघर्षों, उनके सपनों, उनकी अनकही पीड़ा और समाज की दोहरी सोच को बेहद संवेदनशीलता के साथ पन्नों पर उकेरा गया है। यह रचना हर उस पाठक के दिल को छुएगी जो बेटियों के प्रति एक संवेदनशील और नए नज़रिए की तलाश में है।
जय हिंद जय भारत
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