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राजस्थान के एक उजड़े किले में पली-बढ़ी पुरातत्ववेत्ता मीरा, ज़मीन से हर राज़ खोद निकालती है — सिवाय अपने ख़ुद के अतीत के, जिसे वह कभी दफ़न नहीं कर पाई। एक भूकंप में उसकी हथेलियों से धरती की शक्ति फूट पड़ती है। सदियों पहले पाँच ऋषियों ने एक अनंत, विनाशकारी भूख को पाँच तत्वों में बाँट दिया था — अग्नि, जल, वायु, धरती, आकाश। अब धरती जाग चुकी है, और मीरा को किले के नीचे दबे एक ख़तरनाक राज़ — शून्यगढ़ — का सामना करना है। विराज से गहराता प्रेम और रणधीर की खुदाई का ख़तरा, दोनों उसे उस अतीत की ओर खींचते हैं जिसे वह छोड़ नहीं पाती। तेजस और बाक़ी साथियों के साथ, मीरा को सीखना है कि कुछ चीज़ें थामे रखने से नहीं, जाने देने से ही ठीक होती हैं। पंचतत्व — छह किताबों की एक सीरीज़। "धरा" इस सफ़र की चौथी किताब है, जहाँ धरती पहली बार जागती है।
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